क्या आपने चखा है महुआ लड्डू का स्वाद??

महुआ, बचपन से अब तक जो सुना था वो सिर्फ महुआ से बनी शराब तक ही सीमित था। महुआ से बने अन्य व्यंजन मेरे दिमाग के डेटाबेस में कही भी नहीं थे, कुछ एक बार लोगों से बस ये सुन पाया था कि महुआ के लड्डू और लाटा भी बनते है, पर देखा मैन कभी नही था।महुआ का नाम सुनते ही एक नकारात्मक सा विचार मन को घेर लेता था “अच्छा महुआ, मतलब दारू”।एकाएक किसी दिन महुआ के लड्डू को मैंने एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म में देखा, फिर उसके बारे में पढ़ा।अच्छा महुआ इतना गुणकारी है!!! ऐसा कुछ भाव आश्चर्य करते हुए मन मे भटकने लगा और कही जो बचपन से महुआ की छवि बनी हुई थी उसे धीरे से धूमिल करने लगा।फिर मन मे ख्याल आया की जशपुर में भी तो बहुत महुआ है फिर क्या ये यहाँ भी बनाया जा सकता है? पर क्या इसके खरीददार मिलेंगे? तमाम सवाल दिल मे घूमते रहे और ये बात यही थम गई। 

कुछ वर्षों उपरांत, कुछ दिनों पहले ही जशपुर जिला पंचायत के द्वारा बिहान बाजार नामक कार्यक्रम का हिस्सा बनने का अवसर मिला। कार्यक्रम का आयोजन ही इस लिए था कि जितने भी स्वसहायता समूह हैं जिले में, उनके उत्पाद की एक प्रदर्शनी लगाई जा सके।और इस बाजार में दिखे मुझे महुए के लड्डू, वाह!! मज़ा आ गया, इसको टेस्ट तो जरूर करना है । मैं झट से वहाँ पहुँचा और मैन लड्डू चखे, महुआ का जो एक बुरा चित्र बना हुआ था वो अब पूरी तरह मिट चुका था। स्वादिष्ट !!और ऊपर से बेहद फायदेमंद, और क्या चाहिए किसी को? फिर कुछ देर मैने स्वसहायता समूह के महिलाओं से बात की जो लड्डू बना के लाये थे। उनका कहना साफ था “हम बना तो दे पर खरीदेगा कौन??”,फिर लगा की शायद इसी वजह से ये इतने कम दिखाई देते हैं। कुछ दोनों बाद ही एक अच्छी खबर आई कि महिला एवं बाल विकास मंत्री, अनिला भेड़िया जी ने महुआ लड्डू को बस्तर में बच्चों को बांटने की मंजूरी दी है।अब उम्मीद यही है कि शायद यहाँ से महुआ लड्डू को उसका उचित स्थान मिल पाए!!!